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फॉरेक्‍स में कैसे ट्रेड करें

करेंसी युग्‍में और दरें।

फॉरेक्‍स ट्रेडिंग में सभी करेंसियों को युग्‍मों में एक के विरुद्ध दूसरे को उद्धरित किया जाता है। उनके नाम तीन अक्षर के संक्षेपाक्षर में दिए जाते हैं, जिसे आईएसओ कोड के नाम से जाना जाता है, इसमें पहले दो अक्षर देश को दर्शाते हैं तथा तीसरा अक्षर करेंसी का नाम होता है।

इन्‍हें सामान्‍यतया कैसे ट्रेड किया जाता है, इस आधार पर इन्‍हें तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  • सर्वाधिक ट्रेड की जाने वाली करेंसियों को प्राय: मेजर कहा जाता है और इनमें यूएस डॉलर, यूरो, ग्रेट ब्रिटेन पाउंड, जैपनीज़ येन, कनाडियन डॉलर, स्विस फ्रांक, ऑस्‍ट्रेलियन डॉलर और न्‍यूजीलैंड डॉलर शामिल हैं। मेजर युग्‍मों में यूएस डॉलर तथा ऊपर बताई सूची में से अन्‍य करेंसियां शामिल रहती हैं, उदाहरण के लिए EURUSD, USDJPY, USDCHF
  • क्रॉस युग्‍म दो मेजर करेंसियों से मिल कर बनती हैं जिनमें से कोई भी यूएस डॉलर नहीं होता, उदाहरण के लिए EURGBP, EURCHF, EURJPY, GBPCAD, GBPAUD and CHFJPY
  • एग्‍जॉटिक युग्‍म एक मेजर करेंसी तथा दूसरी कम ट्रेड होने वाली करेंसी से मिल कर बनती हैं, उदाहरण के लिए, EURTRY, USDSEK, USDDKK, USDHDK, USDSDG. एग्‍जॉटिक में कम तरलता होती है तथा असाधारण टाइट स्‍प्रेड होते हैं।  

करेंसी दरें हमेशा बेस (पहली) करेंसी की कीमत दर्शाती हैं जिसे उद्धरण (दूसरी) करेंसी में व्‍यक्‍त किया जाता है। फॉरेक्‍स में, दो कीमतें दी जाती हैं – बोली और मांग – पहली कीमत दर्शाती है कि बेस करेंसी की 1 युनिट बेचने के लिए कितनी उद्धरण करेंसी चाहिए तथा बाद वाली कीमत दर्शाती है कि इसे खरीदने के लिए कितने की जरूरत होगी। मांग-कीमत बोली कीमत से अधिक होती है। दोनों कीमतों के बीच का अंतर स्‍प्रेड के रूप में संदर्भित किया जाता है जिसे अक्‍सर पिप्‍स या प्‍वाइंट्स में मापा जाता है।

बोली और मांग मूल्‍य

पहले, जब केवल 4-अक्षर का सटीक(प्रिसिज़न) उपलब्‍ध था, पिप या प्‍वाइंट में प्रतिशत ही कीमत के उतार-चढ़ाव को मापने की सबसे छोटी इकाई थी। अधिक सटीक 5-अक्षर प्राइसिंग के साथ कीमत परिवर्तन की सबसे छोटी इकाई को प्‍वाइंट कहा जाता है, परन्‍तु 1 पिप की अब भी चौथे अक्षर से गणना की जाती है।

पिप और प्‍वाइंट के बीच अंतर

उदाहरण के लिए, यदि बोली कीमत 1.11443 है तथा मांग कीमत 1.11449 के बराबर हो, स्‍प्रेड 0.6 पिप या 6 प्‍वाइंट है।  

आर्डर।  

निर्देशवार, ट्रेड दो प्रकार के होते हैं:

  • खरीदें या लॉंग पोजीशनें मांग कीमत पर खुलती हैं तथा बोली कीमत पर क्‍लोज होती हैं;
  • बेचें या शॉर्ट पोजिशनें बोली पर खुलती हैं तथा मांग पर क्‍लोज होती हैं।

इनमें से किसी को मार्केट या पेंडिंग ऑर्डर के रूप में ओपन किया जा सकता है:

निर्देश मार्केट पेंडिंग
रोकोयुनिट
लॉंग (खरीदें)

मौजूदा मांग कीमत पर ओपन

पूर्वनिर्धारित मांग कीमत पर ओपन, जो मौजूदा कीमत  से अधिक है

ओपन जब मांग कीमत आर्डर लेवल पर पहुंचे; मौजूद मांग कीमत से कम है

शॉर्ट (बेचें)

मौजूदा बोली कीमत पर क्‍लोज

पूर्वनिर्धारित बोली कीमत पर ओपन, जो मौजूदा कीमत से अधिक है। 

पूर्वनिर्धारित बोली कीमत पर ओपन, जो मौजदा कीमत से कम है।

क्‍लोजि़ंग ऑर्डर हमेशा ओपनिंग ऑर्डर से विपरीत होता है, अर्थात, लॉंग (खरीद) पोजीशन को क्‍लोज करके आप राशि को दोबारा बेचते हैं या इसके विपरीत – जब आप एक शॉर्ट (बेचें) पोजीशन को क्‍लोज करके, आप पिछली बार बेची गई राशि को खरीदते हैं।

किसी पोजीशन को मौजूदा बाजार दर पर मैनुअली अथवा एक कीमत स्‍तर विशेष पर पहुंच जाने पर हानि रोकें और लाभ ले जाएं आदेशों से क्‍लोज किया जा सकता है।

  • हानि रोकें हानियां सीमित करने के उद्देश्‍य से होती है तथा शॉर्ट पोजीशनों के लिए ओपन कीमत से ऊपर तथा लॉंग पोजीशनों के लिए ओपन कीमत से नीचे सेट की जाती है।
  • लाभ ले जाएं आपको एक पोजीशन चुनने देती है जब निश्चित लाभ प्राप्‍त हो जाता है। लाभ ले जाएं लेवल शॉर्ट पोजीशन के लिए मौजूदा मांग कीमत से नीचे तथा लॉंग पोजीशन के लिए मौजूदा बोली कीमत से अधिक होता है।

लाभ प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से आपको कीमतें बढ़ने पर लॉंग पोजीशनें और कीमतें कम होने पर शॉर्ट पोजीशनें क्‍लोज करने की जरूरत है।

खरीद ऑर्डर

बिक्री ऑर्डर

लीवरेज वॉल्‍यूम, वांछित मार्जिन

पोजीशन ओपन करने के लिए आपके बैलेंस में निश्चित राशि होनी चाहिए, जिसे सामान्‍यतया वांछित मार्जिन या जस्‍ट मार्जिन कहते हैं। राशि ट्रेडिंग टूल, वॉल्‍यूम और लीवरेज पर निर्भर करती है।

  • ट्रेडिंग टूल करेंसी युग्‍मों, स्‍पॅाट मेटल, आइल या इंडीक्‍स सहित ऐसा कुछ भी है जिसके साथ मूलत: आप ट्रेड कर सकते हैं।
  • वॉल्‍यूम वह राशि है जो आप खरीदते या बेचते हैं और इसे लॉट में मापा जाता है। एक मानक लॉट बेस करेंसी की 100 000 युनिटों के बराबर होता है। अपने बैलेंस तथा अकाउंट किस्‍म के आधार पर आप मिनी लॉट (0.1) तथा माइक्रो लॉट (0.01) में भी ट्रेड कर सकते हैं। वॉल्‍यूम पिप कीमत को परिभाषित करता है, अर्थात, आपका वॉल्‍यूम जितना अधिक है, प्रत्‍येक कीमत की गति उतनी महत्‍वपूर्ण होगी। उदाहरण के लिए, एक लॉट EURUSD की पिप कीमत 10 USD है, EURUSD 0.5 लॉट के लिए यह 5 USD है। आप किसी पोजीशन के लिए पिप कीमत की गणना करने के लिए इस टूल का उपयोग कर सकते हैं।
  • लीवरेज कंपनी द्वारा प्रदान किया गया वास्‍तविक क्रेडिट है। आपकी लीवरेज जितना अधिक है, मार्जिन की आवश्‍यकताएं उतनी कम होंगी। उदाहरण के लिए, जब आप कोई लीवरेज (अनुपात 1:1) उपयोग नहीं करते, आपको EURUSD का एक लॉट ओपन करने  के लिए 100 000 EUR की आवश्‍यकता होगी; यदि आपकी अकाउंट लीवरेज 1:200 है, केवल 500 EUR की आवश्‍यकता होगी। OctaFX द्वारा 1:500 की अधिकतम लीवरेज प्रस्‍तावित की जाती है, अर्थात, आपको एक लॉट खोलने के लिए केवल 200 EUR की आवश्‍यकता होगी।  

फोरेक्‍स ट्रेडिंग में लेवरिज का प्रयोग कैसे किया जाता है

नोट करें यदि आपके पास USD अकाउंट है, तो अपेक्षित मार्जिन की गणना इस प्रकार होगी:

मौजूदा कीमत × लॉट में वॉल्‍यूम × 100 000 युनिटें / लीवरेज।

उदाहरण के लिए, यदि आपका लीवरेज 1:200 है और आप 1.12931 पर 0.5 लॉट  EURUSD ऑर्डर ओपन करते हैं, अपेक्षित मार्जिन है

1.12931 × 0.5 लॉट × 100 000 युनिटें /200 = 282.33 USD.जो

अपेक्षित मार्जिन की गणना हमेशा प्‍लेटफॉर्म से स्‍वत: होती है। पोजीशन विेशेष को ओपन करने के लिए लगभग कितना चाहिए, इसे जानने के लिए, आप हमारे फॉरेक्‍स केलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं।

बैलेंस, इक्विटी, फ्री मार्जिन, मार्जिन लेवल।  

आप जब कोई पोजीशन ओपन करते हैं, नोट करें कि आपका बैलेंस बना रहे। तथ्‍यत: इसमें केवल डिपॉजिट, निकासियां और क्‍लोज्‍ड ट्रेड शामिल होते हैं।

अपेक्षित मार्जिन की राशि “फ्री मार्जिन” फील्‍ड से काट ली जाएगी, जो आपके फ्लोटिंग लाभ या हानि और डिपॉजिट बोनस, जिसका दावा आपने किया है, से मिल कर बनती है। फ्री मार्जिन वह फंड है जिससे आप अपनी पोजीशन खोल सकते हैं। नोट करें कि जब आप समान वॉल्‍यूम से हैज आर्डर ओपन करते हैं, तो मार्जिन की आवश्‍यकता नहीं होगी; परन्‍तु, यदि आपका फ्री मार्जिन ऋणात्‍मक है, तो आप विपरीत पोजीशन ओपन करने में सक्षम नहीं होंगे।

फ्री मार्जिन = बैलेंस – अपेक्षित मार्जिन + फ्लोटिंग लाभ/हानि (+बोनस).

आपके लाभ या हानि से प्रभावित होने वाला अन्‍य मूल्‍य, जिसकी गणना नीचे की गई है:

इक्विटी = बैलेंस + फ्लोटिंग लाभ/हानि (+बोनस)

इक्विटी महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि अपेक्षित मार्जिन के साथ यह आपका मार्जिन लेवल निर्धारित करता है:

मार्जिन लेवल = इक्विटी / अपेक्षित मार्जिन × 100%

यदि आपका मार्जिन लेवल 15% से कम हो जाता है, तो आपकी पोजीशन सर्वाधिक फ्लोटिंग हानि वाले ट्रेड से शुरू होकर अनिवार्य रूप से क्‍लोज हो जाएगी।

बैलेंस, इक्विटी, फ्री मार्जिन और मार्जिन लेवल की गणना प्‍लेटफॉर्म तथा “ट्रेड टैब” में उपलब्‍ध एनीटाइम से स्‍वत: की जाती है।

MT4 प्‍लेटफॉर्म में ट्रेड टैब

ट्रेडिंग कैसे शुरू करें।

मूलत:, फॉरेक्‍स ट्रेडिंग शुरू करने के लिए आपको अकाउंट खोलने तथा ट्रेडिंग प्‍लेटफॉर्म डाउनलोड एवं इन्‍सटॉल करने अथवा MT4 या cTrader वेब आधारित टर्मिनल में साइन इन करने की जरूरत है।

डेमो अकाउंट आपको जोखिम मुक्त प्रेक्टिस करने देता है, जबकि रियल अकाउंट के साथ आप  5 USD जितनी कम राशि के तौर पर न्‍यूनतम डिपाजिट के साथ रियल मार्केट का अनुभव प्राप्‍त कर सकेंगे।

यदि आप ट्रेडिंग प्‍लेटफॉर्म से परिचित नहीं हैं, तो विस्‍तृत दिशानिर्देशें के लिए हमारा मैनुअल सेक्‍शन देखना सुनिश्चित करें। ़

फॉरेक्‍स मार्कट कैसे काम करती है, इसकी अधिक सूचना, कीमतों की दिशा का अनुमान लगाने के लिए आप किन टूलों और रणनीतियों को काम में ले सकते हैं या आप किन रणनीतियों को लागू कर सकते हैं, की जानकारी आर्टिकल्‍स पर उपलब्‍ध है।

मार्केट, OctaFX वेबसाइट या ट्रेडिंग शर्तों के संबंध में यदि आपके पास कोई प्रश्‍न है, तो आप हमारे विस्तृत और व्यापक एफएक्‍यू को देख सकते हैं।

जब आपका सामना किसी अपरिचित शब्दावली, शब्द या बाजार घटनाओं से हो, तो आप इसकी व्‍याख्‍या और विवरण की जांच फॉरेक्‍स शब्‍दावली से कर सकते हैं।

हमारी पुरस्‍कार विजेता कस्‍टमर सर्विस को आपके सभी प्रश्‍नों का उत्‍तर देने में हमेशा खुशी होगी और यह 24/5 उपलब्‍ध है।

 

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